गूगल जनरेटिव एआई कार्यशाला: शिक्षकों का सशक्तिकरण और शैक्षणिक उत्पादकता
हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) ने SSC NASSCOM और उसके डिलीवरी पार्टनर स्मार्टब्रिज एजुकेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (SmartBridge Educational Services Pvt. Ltd.) के सहयोग से 30 जुलाई 2026 को DCRUST, मुरथल में “जनरेटिव एआई और एआई-संचालित शैक्षणिक उत्पादकता के साथ शिक्षकों का सशक्तिकरण” (Empowering Educators with Generative AI & AI-Powered Academic Productivity) विषय पर एक दिवसीय गूगल जनरेटिव एआई कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों और संस्थागत SPOCs को शिक्षण, अनुसंधान, मूल्यांकन, पाठ्यक्रम विकास और शैक्षणिक प्रशासन में जनरेटिव एआई के उपयोग का व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव प्रदान करना था।
कार्यशाला की शोभा HSHEC के अध्यक्ष प्रो. के. सी. शर्मा, HSHEC के उपाध्यक्ष प्रो. एस. के. गक्खड़, DCRUST के कुलपति प्रो. एस. पी. सिंह और HSHEC के राज्य परियोजना निदेशक प्रो. आर. एस. राठौड़ ने बढ़ाई। कार्यशाला में राज्य भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने वाले संकाय सदस्यों और संस्थागत SPOCs ने भाग लिया।
कार्यशाला में छह तकनीकी सत्र शामिल थे जिनमें जनरेटिव एआई के मूलभूत सिद्धांत, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs), जिम्मेदार एआई (Responsible AI) और गूगल के जनरेटिव एआई लर्निंग पाथवे को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने गूगल के एजेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसमें प्रॉम्प्ट डिज़ाइन अभ्यास और चुनौती-आधारित गतिविधियाँ शामिल थीं। इसके बाद के सत्रों में गूगल जेमिनी (Google Gemini), नोटबुक-एलएम (NotebookLM), गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio), चैटजीपीटी (ChatGPT), क्लॉड (Claude), गामा (Gamma), कैनवा एआई (Canva AI) और परप्लेक्सिटी एआई (Perplexity AI) जैसे प्लेटफॉर्मों का उपयोग करके पाठ योजना (lesson planning), पाठ्यक्रम डिज़ाइन, शोध, शैक्षणिक दस्तावेज़ीकरण, मूल्यांकन निर्माण और शैक्षणिक कार्यप्रवाह स्वचालन के लिए एआई टूल्स के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन सत्रों में निर्देशित प्रदर्शनों और संवादात्मक अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक कार्यान्वयन पर बल दिया गया।
कार्यशाला ने जनरेटिव एआई अवधारणाओं, जिम्मेदार एआई प्रथाओं और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तकनीकों के प्रति प्रतिभागियों की समझ को बढ़ाया। संकाय सदस्यों ने एआई की मदद से शिक्षण सामग्री, मूल्यांकन, प्रस्तुतियाँ और शोध परिणाम विकसित करने के व्यावहारिक कौशल हासिल किए, साथ ही नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यप्रवाहों में एआई टूल्स को एकीकृत करना भी सीखा। इस कार्यक्रम से एआई-तैयार शिक्षकों को विकसित करने और हरियाणा के उच्च शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जिम्मेदारी से अपनाने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यह कार्यशाला उच्च शिक्षण संस्थानों में जनरेटिव एआई को एकीकृत करने की दिशा में एक शुरुआती क्षमता-निर्माण पहल के रूप में रही। इसके बाद, भाग लेने वाले संस्थानों को अन्य संकाय सदस्यों के लिए इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, संस्थागत एआई उपयोगकर्ता समूह (AI user groups) स्थापित करने और शिक्षण-अधिगम, शोध तथा शैक्षणिक प्रशासन में एआई टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। राज्य भर के संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच उन्नत एआई क्षमताओं का निर्माण करने के लिए SSC NASSCOM और गूगल लर्निंग पहलों के साथ निरंतर सहयोग की संभावनाओं को भी तलाशा जा सकता है।