भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) पर आधारित विषय-सामग्री (कंटेंट) विकसित करने पर केंद्रित कार्यशाला
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्राचीन भारतीय ज्ञान को शामिल करने और उसके लिए प्रामाणिक सामग्री विकसित करने के उद्देश्य से एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें भौतिक और जीवन विज्ञान (Physical & Life Sciences) संकायों के विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु:
पाठ्यक्रम संरेखण और वित्तपोषण: तकनीकी सत्रों में NEP 2020 के साथ पाठ्यक्रमों के तालमेल और शिक्षा मंत्रालय के IKS प्रभाग द्वारा समर्थित संस्थागत योजनाओं, शोध अनुदानों (Research Grants) और फंडिंग मॉडलों के बारे में जानकारी दी गई।
समकालीन प्रासंगिकता: IKS को केवल ऐतिहासिक अध्ययन न मानकर एक सक्रिय घटक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें पाणिनि के नियम-आधारित व्याकरण और नारायण पंडित के मैट्रिस (Matrices), मॉड्यूलर अंकगणित और बाधा- संतुष्टि समस्याओं (Constraint-satisfaction problems) का उल्लेख करते हुए भारत के एल्गोरिथम सोच के इतिहास को रेखांकित किया गया।
विषय-विशेष सत्र: भौतिकी, गणित, पारंपरिक पादप वर्गीकरण (Plant Taxonomy), एथनोबॉटनी और सतत जीवन शैली में शिक्षण मॉड्यूल विकसित करने पर चर्चा हुई।
कार्यान्वयन हेतु मुख्य सिफारिशें:
मॉड्यूलर कोर्स डिजाइन: शुरुआती चरण में ऐसे यूनिट-स्तरीय मॉड्यूल तैयार करना जो पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ जोड़ सकें।
पांडुलिपि और पाठ अनुवाद: शास्त्रीय मूल ग्रंथों (Classical Primary Texts) को सूडोकोड (Pseudocode) और समकालीन वैज्ञानिक शब्दावली में अनुवादित करना।
अंतर-विषयक अनुसंधान: समीक्षात्मक शिक्षण सामग्री प्रकाशित करने के लिए अंतर-विषयक अनुसंधान क्लस्टर (Interdisciplinary Research Clusters) बनाना।