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    क्लस्टरिंग और संसाधन साझाकरण पर कार्यशाला

    • प्रारंभ तिथि : 30/01/2026
    • समाप्ति तिथि : 30/01/2026
    • कार्यक्रम का स्थान : Govt. College, Sector 1, Panchkula

    हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) और उच्च शिक्षा विभाग, हरियाणा सरकार ने मेजबान कॉलेज के सहयोग से ‘क्लस्टरिंग और संसाधन साझाकरण के मूलभूत सिद्धांतों’ पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में कुलपति, डीन, प्राचार्य, एनईपी नोडल अधिकारियों और HSHEC तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित वरिष्ठ शैक्षणिक नेतृत्व ने भाग लिया।

    उद्घाटन सत्र की शोभा प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ाई, जिनमें प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष, HSHEC; प्रोफेसर एस. के. गाखर, उपाध्यक्ष, HSHEC; प्रोफेसर रवींद्र डी. कुलकर्णी, कुलपति, मुंबई विश्वविद्यालय; प्रोफेसर एस. के. मेहता, पूर्व कुलपति, लद्दाख विश्वविद्यालय; प्रोफेसर पवन शर्मा, प्रो-कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा; प्रोफेसर मंजुला चौधरी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय; डॉ. शैलजा छाबड़ा, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर 1, पंचकुला; और श्री एस. नारायणन, महानिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, हरियाणा शामिल थे।

    हरियाणा के राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस कार्यशाला में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें कुलपति, डीन, प्राचार्य और एनईपी नोडल अधिकारी शामिल थे। विशेष रूप से, कुलपति प्रोफेसर दीप्ति धरमणी, कुलपति, चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी; प्रोफेसर सुदेश और प्रोफेसर सैनी भी उपस्थित थे और उन्होंने विचार-विमर्श में सक्रिय योगदान दिया।

    इस कार्यशाला का उद्देश्य NEP 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) की क्लस्टरिंग (समूहन) की अवधारणा को बढ़ावा देना था, ताकि बहुविषयक शिक्षा (multidisciplinary education) को बेहतर बनाया जा सके, बुनियादी ढांचे और संकाय संसाधनों का अनुकूलन (optimize) किया जा सके, क्रेडिट ट्रांसफर को सक्षम बनाया जा सके और ब्लेंडेड लर्निंग मॉडल का समर्थन किया जा सके। विशेषज्ञ वक्ताओं ने महाराष्ट्र और लद्दाख के राष्ट्रीय सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा किया, क्लाउड-आधारित संसाधन साझाकरण पर प्रकाश डाला और दोहरी डिग्रियों तथा क्लस्टर यूनिवर्सिटी मॉडल पर चर्चा की।

    पैनल चर्चा में क्रेडिट साझाकरण के लिए स्वयं (SWAYAM) मूक्स (MOOCs) के उपयोग, संकाय क्षमता निर्माण, नीतिगत समर्थन और साझा सार्वजनिक शैक्षणिक संसाधनों के प्रति मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया गया।